FOUNDER STORY

मेरे मन में समाज के लिए कुछ करने की चाहत बचपन से ही थी,बचपन में मै कई बार बैठे-बैठे सोचा करता था की में एक ऐसा ओल्ड ऐज होम ओर स्कूल संचालित करूँगा।जहाँ का कैंपस एक ही हो।ताकि उन ओल्ड ऐज होम के माँ बाप को उन स्कूल के बच्चों के रूप में अपने नाती पोते ओर अपने बच्चे मिल सके।ओर वो उन सभी बच्चों के साथ अपना जीवन खुशी खुशी व्यतीत कर सके।आज भी जब मैं उस कैंपस की परिकल्पना करना हूँ,तो दिल प्रफुल्लित हो जाता है।ओर उन सभी बच्चो ओर दादा दादी का खिलता ओर मुस्कराता हुआ ही चेहरा दिखाई पड़ता है।
जब में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने भोपाल गया।तो मैं बिल्कुल अकेला अकेला रहने लगा।जिस कारण में डिप्रेशन का शिकार हो गया।ओर पता नही अपने आप से ही मैं क्या क्या बकवास करने लगा।फिर जब घर वालों ने हौसला दिया उसके बाद मैंने अपने आप को संभालने का प्रयास किया।ओर धीरे धीरे मैंने वो काम स्टार्ट किये जो मुझे खुशी देते थे,अपनी खुशी के लिए मैंने गिटार सीखना शुरू किया।ओर हमेशा ही मेरा रुझान समाज के कमझोर वर्ग के लिए कुछ करने का रहा है,तो सोशल मीडिया पर मैंने बहुत से सामाजिक संस्था के बारे में पता किया जिनसे में जुड़ सकू।पर पता नही क्यों मैं उन सभी संस्थाओ से बात करने की हिम्मत नही कर पाया।ओर ऐसे ही एक दिन कोचिंग पर बैठे ही मुझे एक दोस्त ने एक आर्गेनाइजेशन (दिशंजली)के बारे में बताया।जो गरीब ओर सरकारी स्कूल के बच्चो की शिक्षा के लिए इंदौर ओर भोपाल में कई सालों से वर्क कर रही हैं,मैं उनके टीम मेंबर्स के साथ एक सरकारी स्कूल में दो घण्टे की क्लास लेने गया।ये सभी मेंबर्स हर हफ्ते अपने बिजी ज़िन्दगी के दो घण्टे इन बच्चों के नाम करते है,वाकई उस दिन मुझे जो खुशी का अनुभव हुआ उसको शायद ही में शब्दो में व्यक्त कर पाऊ।इस तरह मैंने अपने सेंटर्स पर रेगुलर क्लासेज लेना शुरू किया।ओर उन सभी बच्चों के साथ बहुत से नये नये अनुभव मुझे मिले।ओर मैंने बहुत कुछ उनसे सीखा ओर जो कुछ मैं उन्हें सीखा सकता था मैंने उन्हें सिखाया।
जब एग्जाम के बाद मैं घर आया।तो मुझे लगा की यहाँ शिवपुरी का युवा भी बहुत परेशान है,उसके पास भी समस्या तो बहुत है,पर उनका समाधान नहीं है,ओर बहुत से लोगों को हमारी जरूरत है,इसलिए मैंने यहाँ एक युवा ग्रुप बनाने का सोचा।ये बात मैंने अपने दोस्त चित्रांश अग्रवाल ओर कुछ दोस्तो के साथ शेयर की।उन्होंने भी मेरा साथ दिया।इस तरह डोनेट अ स्माइल फाउंडेशन का गठन हुआ।जिससे हम सब लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकें ओर मुरझाये हुए युवा फिर खिल खिला उठे।ओर उनके अंदर की लीडरशिप स्किल हम बाहर ला सकें।ओर जो मैंने सपने देखे है,वो पूरे हो सकें।ओर आगे की स्टोरी तो आप सब लोग जानते ही हैं।
धन्यवाद की आप लोगों ने मेरी स्टोरी को पढ़ने के लिए समय निकाला।आपका साथी प्रबल अग्रवाल।

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